कमल फूल वाली भाजपा भी कमाल की पार्टी है. विश्व की सबसे बड़ी पार्टी. करोड़ो कार्यकर्ता और नेता. राजनीतिक समुद्र भी कहा जाता है. लेकिन आश्चर्य कि इतनी बड़ी पार्टी की निगाह सभी कार्यकर्ताओं पर रहती है. पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाकर पार्टी नेतृत्व ने इसे साबित किया है. श्री राम की नियुक्ति ने सबको चौंका दिया. राजनीतिक वनवास काट रहे राम ने भी सपने में नहीं सोचा होगा कि उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है.
हमारे जैसे पत्रकार और झारखंड के लोगों को भी ऐसी कल्पना नहीं थी. जब उनका नाम सामने आया तो कुछ देर तक किसी को यकीन नहीं हुआ. लोग पता करने लगे कि ये कौन हैं. पलामू वाले या दूसरे. इस नियुक्ति ने फिर साबित किया कि भाजपा अन्य दलों से अलग है. कब क्या फैसला लेगी, किसको कहां बैठा देगी कहना मुश्किल है. हर बार कुछ ऐसा फैसला लेती है जो सबको चकित कर जाता है.
तीन बार सांसद रहे, लेकिन लंबे समय से राजनीति में हाशिये पर थे
ब्रजमोहन राम दलित समाज से आते हैं. सीधे सरल स्वभाव के हैं. लो प्रोफाइल में रहते हैं. दिखावा और तामझाम में भरोसा नहीं. सबके लिए सर्व सुलभ रहे. इसीलिए पलामू में उनकी लोकप्रियता रही. तीन बार सांसद रहे बावजूद कभी रौब व दिखावे में नहीं बिता. दिल्ली की सत्ता में पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी जब से आई है तब से राम सांसद भी नहीं हैं. बहुत संभव है कि मोदी और अमित शाह इन्हें पहचानते भी नहीं होंगे. पिछले कई वर्षों से राम राजनीतिक रूप से हाशिये पर थे. लगभग भूलने लगे थे. कहीं कोई लॉबी नहीं. न ऊपर तक पहुंच पैरवी. लेकिन पार्टी के प्रति हमेशा वफादार बने रहे. यही वजह है कि पार्टी ने लंबे समय बाद इन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी.
ओडिशा के राज्यपाल पद तक पहुंचने वाले झारखंड के दूसरे नेता
अचानक ओडिशा जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश का राज्यपाल बना दिया. रघुवर दास के बाद राम दूसरे ऐसे नेता हैं जिन्हें झारखंड से ओडिशा का ही राज्यपाल नियुक्त किया गया. पलामू प्रमंडल के लिए भी गौरव का विषय है. स्वर्गीय भीष्म नारायण सिंह के बाद दूसरी बार किसी व्यक्ति को राज्यपाल बनाया गया है. ब्रजमोहन राम की नियुक्ति के पीछे भाजपा की चुनावी रणनीति भी दिखती है. दलित समाज से आने वाले नेता को राज्यपाल बनाकर भाजपा ने इस समाज को यह संदेश दिया है कि भाजपा आपके साथ हैं. आपको सम्मान और प्रतिनिधित्व दे रही है.