जनकपुरधाम: जहां सीमा खत्म होती है, संस्कृति शुरू होती है
कुमार कृष्णन सीमा रेखाएं देशों को बांटती हैं, संस्कृतियां नहीं। नक्शे पर खिंची एक रेखा भारत को नेपाल से अलग करती है, लेकिन मिथिला की स्मृतियों में ऐसी कोई रेखा नहीं है। जनकपुर पहुंचते ही यह बात सबसे अधिक स्पष्ट होती है। यहां अयोध्या से आई राम की बारात की स्मृति है, सीता की जन्मभूमि … पूरा पढ़ें →